आउटसोर्सिंग कर्मियों के शोषण का हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, यूपी के 75 जिलों के स्वास्थ्य अफसरों को नोटिस, एक सप्ताह में मांगा जवाब

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत विभिन्न चिकित्सालयों में कार्यरत लाखों आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के समान पद का समान वेतन, नौकरी से निकाले ना जाने, पूरे प्रदेश में एक टेंडर व्यवस्था लागू करने तथा वर्ष 2015 में लघु उद्योग निगम द्वारा निर्धारित वेतनमान की मांग को लेकर संयुक्त स्वास्थ आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ द्वारा उच्च न्यायालय इलाहाबाद में उत्तर प्रदेश शासन तथा 75 जिलों के सीएमओ के खिलाफ याचिका दाखिल किया गया है। जिस पर चार अक्टूबर को सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने 75 जिलों के सीएमओ, एसीएस चिकित्सा स्वास्थ्य, निदेशक उप्र मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन, प्रभारी जेम सेल उप्र, महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब तलब किया है। संघ के महामंत्री सच्चितानंद मिश्रा का कहना है कि प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में लाखों कर्मचारी विभिन्न पदों पर आउटसोर्सिंग से पिछले कई वर्षों से कार्यरत हैं। जिले के सीएमओ द्वारा मनमाना रवैया अपनाते हुए पुराने कर्मचारियों की सेवा समाप्ति तथा नए अनुबंध करके नई नियुक्ति करवाई जाती है। शासन की ओर से जेम पोर्टल द्वारा मानव आपूर्ति का अनुबंध किए जाने संबंधित दिशा-निर्देश जारी हुआ था, जिसमें यह व्यवस्था थी कि लोकल स्तर पर टेंडर नहीं किया जाएगा। बंच विधि से टेंडर होगा। लेकिन तमाम जिलों के सीएमओ द्वारा लोकल टेंडर करवाकर पुराने कर्मचारियों को हटा दिया गया और नए कर्मचारी नई कंपनी द्वारा तैनात कराए गए। श्री मिश्र के मुताबिक संविदा कर्मचारी संघ द्वारा लगातार शासन तथा मंत्री से मांग की गई थी कि पुराने कर्मचारियों को न हटाया जाए, जिस पर मंत्री चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने यह आदेश जारी किया कि कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त न की जाएं, फिर भी तमाम जनपदों में हजारों की संख्या में कोरोना काल के दौरान कर्मचारियों को कार्यमुक्त कर दिया गया।

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