खाली पड़े हैं अस्पताल में कोविड बेड, फिर क्यों भटक रहे हैं नॉन कोविड मरीज

नई दिल्ली : दिल्ली में घट रहे कोरोना के मामलों के साथ अस्पतालों में 96 फीसदी तक बेड खाली हो गए हैं, लेकिन अस्पतालों में नॉन कोविड मरीजों के लिए बेड खाली नहीं है। जीबी पंत सहित ‌दिल्ली के कई बड़े अस्पतालों में सामान्य मरीजों को उपचार के लिए बेड नहीं मिल पा रहे हैं। दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार रविवार को दिल्ली में कोरोना के 1410 मामले सामने आए। इस आंकड़ा इस साल में सबसे कम है। इससे पहले 1 जनवरी 2022 को दिल्ली में कोरोना के 2716 मरीज सामने आए थे। इन कोरोना मरीजों के उपचार के लिए दिल्ली के अस्पतालों में 15416 बेड उपलब्ध हैं। इनमें से केवल 965 बेड पर ही मरीज भर्ती हैं, जबकि 14451 बेड खाली हैं। वहीं दिल्ली के कई बड़े अस्पताल ऐसे हैं जहां 100 फीसदी तक बेड खाली हो चुके हैं। इनमें द्वारका स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल, सरदार वल्लभाई पटेल कोविड अस्पताल (डीआरडीओ), एम्स झज्जर, जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शामिल हैं। वहीं बुराड़ी अस्पताल में केवल 2 मरीज, जीटीबी अस्पताल में 20 मरीज, लोकनायक में 47 मरीज, लेडी हार्डिंग में 31 मरीज, बेस अस्पताल में 132 मरीज, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में 17 मरीज, अंबेडकर अस्पताल में 3 मरीज, राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 1 मरीज, एम्स ट्रामा में 135 मरीज, बाड़ा हिंदूराव में 5 मरीज, सफदरजंग अस्पताल में 28 मरीज, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में 14 मरीज, दीपचंद बंधु अस्पताल में 5 मरीज, बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल में 9 मरीज, संजय गांधी अस्पताल में 3 मरीज, एम्स में 19 मरीज और नॉर्दन रेलवे अस्पताल में 1 मरीज भर्ती हैं। वहीं दिल्ली के निजी अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में बेड खाली हो चुके हैं। वहीं कई अस्पताल ऐसे हैं जहां 100 फीसदी तक बेड खाली हो चुके हैं। इन अस्पतालों की मांग है कि अस्पताल में आरक्षित कोविड बेड को सामान्य मरीजों के इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी जानी चाहिए।

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