29 साल के आदमी के मूत्राशय से निकले आधा किलो के 20 पत्थर, ISIC में हुआ इलाज

नई दिल्ली : इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर (ISIC) के डॉक्टरों ने लकवाग्रस्त आदमी के मूत्राशय से आधा किलो के कम से कम 20 पत्थरों को सफलतापूर्वक निकाला। मरीज आईएसआईसी में रिहैबिलिटेशन के लिए आया था। 29 वर्षीय व्यक्ति का रिहैबिलिटेशन चल रहा था। इसी दौरान उनमे जांच द्वारा मूत्र संबंधी समस्याओं का पता चला। आईएसआईसी के डॉक्टरों की टीम में डॉ प्रशांत जैन, एमएस जनरल सर्जरी, डीएनबी युरोलॉजी, MNAMS, सीनियर कंसल्टेंट & यूरोलॉजी एंड एंड्रोलॉजी डिपार्टमेंट प्रमुख, आईएसआईसी, वसंत कुंज, नई दिल्ली द्वारा स्कैन करने से मूत्राशय में 20 पत्थर होने का पता चला। ये पत्थर आकर में बड़े थे। पीड़ित मध्य प्रदेश के मोरेना का रहने वाला दीपक नाम का व्यक्ति है। दीपक को दो साल पहले रीढ़ की हड्डी में तब चोट लग गयी थी जब वह अपने घर पर उंचाई से गिर गए थे। गिरने के दौरान उन्हें डी 12 स्पाइन लेवल पर कम्प्रेशन फ्रैक्चर के रूप में रीढ़ की हड्डी में चोट लगी थी। उनका आईएसआईसी में इलाज चल रहा था, जहाँ पर उन्हें इलाज और रिहैबिलिटेशन के उद्देश्य से डॉ. एच.एस. छाबड़ा को रेफर किया गया। आईएसआईसी, नई दिल्ली के डॉ डॉ प्रशांत जैन, एमएस जनरल सर्जरी, डीएनबी युरोलॉजी, MNAMS, सीनियर कंसल्टेंट & यूरोलॉजी एंड एंड्रोलॉजी डिपार्टमेंट प्रमुख, आईएसआईसी , वसंत कुंज, नई दिल्ली ने कहा, "लकवाग्रस्त सभी मरीजों में लोअर यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन होते हैं, इससे मूत्राशय और आंत्र प्रभावित होती हैं। पीड़ित का मूत्राशय भी ठीक से काम नहीं कर रहा था और इसलिए उनमें कैथेटर लगाना पड़ा। हम इसे सेकेंडरी न्यूरोजेनिक ब्लैडर कहते हैं। जब वह हमारे पास आए तो उनके केस में यूरोलॉजी डिपार्टमेंट का भी जिक्र था। जब मैंने उनकी जांच की, तो उनके मूत्राशय में कई पत्थर थे जो धीरे धीरे बढ़ रहे थे। एक्स-रे के बाद हमने अन्य जांचों के साथ एक सीटी स्कैन भी करवाया। सीटी स्कैन में मूत्राशय में कम से कम 20 पत्थरों के होना का पता चला।" डॉ प्रशांत जैन, एमएस जनरल सर्जरी, डीएनबी युरोलॉजी, MNAMS, सीनियर कंसल्टेंट & यूरोलॉजी एंड एंड्रोलॉजी डिपार्टमेंट प्रमुख, आईएसआईसी , वसंत कुंज, नई दिल्ली ने आगे कहा "कि सौभाग्य से मरीज के किडनी में कोई पथरी नहीं थी। उनकी किडनी अच्छे से काम कर रही थी।" डॉ प्रशांत जैन, एमएस जनरल सर्जरी, डीएनबी युरोलॉजी, MNAMS, सीनियर कंसल्टेंट & यूरोलॉजी एंड एंड्रोलॉजी डिपार्टमेंट प्रमुख, आईएसआईसी , वसंत कुंज, नई दिल्ली ने आगे बताया, "मूत्राशय से पथरी निकालने के दो तरीके होते हैं। मूत्राशय की क्षमता कमजोर थी। साथ ही इस केस में मूत्राशय में संक्रमण और पथरी भी हो गई। इसलिए हमने मरीज की काउंसलिंग की और फिर ओपन सिस्टोलिथोटॉमी प्रक्रिया द्वारा पथरी को एक बार में हटाने का फैसला किया। ऑपरेशन सामान्य एनेस्थेसिया के के द्वारा ऑपरेशन थिएटर में किया गया था। सर्जरी के बाद मरीज ने बहुत अच्छे से प्रतिक्रिया दी। हमने मूत्राशय में एक छोटे से छेद के माध्यम से पत्थरों को निकाला। यह छेद सुप्राप्यूबिक एरिया में बनाया गया था। सभी पत्थरों को एक बार में हटा दिया गया और फिर मूत्राशय और घाव की मरम्मत की गई। मरीज अब पूरी तरह से ठीक है।" डॉ प्रशांत जैन के अनुसार न्यूरोजेनिक ब्लैडर कम क्षमता के ब्लैडर (मूत्राशय) इन्फेक्शन वाले होते हैं और इनमे पत्थर होने का खतरा ज्यादा होता है। ज्यादातर लकवाग्रस्त मरीजों में यह समस्या होना आम बात होती है क्योंकि इस अवस्था में उनका मूत्राशय ढंग से काम नहीं कर रहा होता है। मूत्राशय शरीर में एक स्टोरेज यूनिट की तरह काम करता है और यह शरीर से यूरीन को भी बाहर निकालने का काम करता है। उन्होंने आगे बताया, " लकवा ग्रस्त मरीजों में जिनका न्यूरोजेनिक ब्लैडर होता है वे यूरीन को पत्थर में बदलते हैं और यूरीन को खाली नहीं करते हैं। इसलिए यूरीन का कुछ भाग धीरे मूत्राशय में जमा होने लगता है। यूरीन के बहाव में ये तलछटी में बचे हुए यूरीन मथते रहते हैं जिसकी वजह से मूत्राशय में ठोस पत्थर सा बन जाता है। इसलिए मूत्राशय का इन्फेक्शन और मूत्राशय की पथरी और अन्य इन्फेक्शन न्यूरोजेनिक मूत्राशय (ब्लेडर) में ज्यादा देखने को मिलते हैं।" न्यूरोजेनिक ब्लैडर एक ऐसा शब्द है जो आंतरिक या बाहरी ट्रामा, बीमारी या चोट से उत्पन्न होने वाले न्युरोलॉजिक संबंधी डिसफंक्शन के कारण मूत्राशय में होने वाली खराबी के लिए उपयोग किया जाता है।

Simple GST Billing

Package: Easy to Maintain GST Billing Developed By Easy Enterprises Contact:6394392122,9415804025

Most Populars