लखनऊ में किसान महापंचायत: राकेश टिकैत का मोदी सरकार पर हमला, कहा-यह सरकार कागजों में झूठ बोलती है

लखनऊ: राजधानी के ईको गार्डेन में शनिवार को किसान महापंचायत को भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने संबोधित किया। राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों की जमीनें हड़पने की कोशिश की जा रही है। यह एकमात्र ऐसी सरकार है जो कागजों में झूठ बोलती है। पहले कहा कि बिजली मुफ्त देंगे, फिर कहा मीटर लगेंगे। जब मीटर लगेंगे तो बिजली मुफ्त कैसे दी जाएगी? उन्होंने कहा कि किसानों का धान आधे रेट में व्यापारी और आधी में सरकार खरीदेगी। किसान पराली जलाएंगे तो मुकदमे होंगे। सरकार बताए कि बिना पराली के ऐसी कौन सी तकनीक है कि धान पैदा किया जा सकता है। राकेश टिकैत ने यूपी की पूर्व सीएम मायावती की तारीफ भी की। कहा कि मायावती सरकार में सबसे अच्छा किसानों के लिए काम हुआ था। वहीं टिकैत ने केंद्र की भाजपा सरकार पर हमला भी बोला। कहा कि यह सरकार तानाशाही की सरकार है। इस सरकार में किसानों का कोई भला नहीं हो सकता है। कहा कि यह चुनी हुई सरकार नहीं है। इसलिए यह ठीक से काम नहीं कर रही है। मौजूदा सरकार ने विपक्ष को डरा रखा है। ऐसे में वह भी बहुत विरोध नहीं कर पा रहे हैं। प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों से आह्वान किया कि वह बड़ी लड़ाई की तैयारी करें और संगठन को और मजबूत करें। जल्द ही सरकार से दो-दो हाथ करने हैं क्योंकि सरकार ने कागजों पर लिखकर वादा करने के बावजूद उनका पालन नहीं किया है। टिकैत ने किसानों से ट्रैक्टर और ट्विटर दोनों ही चलाना सीखने की अपील की है। भाकियू प्रवक्ता ने कहा कि इसी सरकार ने वर्ष 2005 में बिहार में मंडी खत्म करके वहां के किसान को बर्बाद कर दिया और वहां के किसान मात्र 800 रुपये प्रति कुंतल धान बेच रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के किसानों को बर्बाद कर दिया। सेब के किसान बुरी तरह से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि चाहे जेवर एयरपोर्ट हो, आजमगढ़ हो या लखनऊ के किसानों की जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा है और पैसा नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 की भूमि अधिग्रहण नीति में संशोधन करते हुए जिलाधिकारी को जमीन खरीदने की सारी शक्तियां दे दी गई हैं। इससे किसान बर्बाद हो रहा है। बादशाह कहता है कि 2047 में विकास होगा पर तब तक किसानों की सभी जमीन चली जाएगी। टिकैत ने कहा कि आजादी की लड़ाई 90 वर्ष तक चली थी वह तो इस से भी खतरनाक दौर था लेकिन यदि किसान नहीं चेते तो वही दौर आ जाएगा क्योंकि इस समय अघोषित इमरजेंसी है कलम और कैमरे पर बंदूक का पहरा है। सोशल मीडिया पर सरकार का शिकंजा है। यह तो अच्छा रहा कि नीतीश बिहार में बच गए वरना उद्धव ठाकरे जैसा हाल हो जाता। राकेश टिकैत ने घोषणा की है कि जिन अधिकारियों ने किसानों को इस पंचायत में भाग लेने से रोका है हर जिले में उनके यहां अगले तीन दिन में धरना प्रदर्शन होंगे। यह तीन दिन का एक कोर्स होगा जो इन अधिकारियों को सबक सिखाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार नहीं चेती तो गांव-गांव सरकार के खिलाफ सुताई अभियान होगा। राकेश टिकैत ने मंच से कहा सभी किसान ट्रैक्टर और ट्विटर दोनों चलाना सीखें। अगली लड़ाई इसी की है। लड़ाई में यह ट्रैक्टर ही काम आएंगे। सरकार इन पर लगाम लगाने की पूरी कोशिश कर रही है लेकिन अपने ट्रैक्टरों को और मजबूत करो। आठ बार के सांसद रहे हन्नान मोल्लाह ने कहा कि 8 दिसंबर को अब बड़ी बैठक कर हम आंदोलन में आगे की रणनीति बनाएंगे। आंदोलन ऐसा होगा कि हम सरकार को अपनी मांगों को मनवाने के लिए मजबूर कर देंगे। अब हम सरकार को दिखाएंगे कि सरकार को कैसे हटाते हैं और 2024 में बाहर करते हैं। ईको गार्डन में प्रदेश भर से करीब 15 हजार से अधिक किसान पहुंचे थे। किसानों को 300 यूनिट फ्री बिजली, सिंचाई के लिए फ्री बिजली, गन्ना खरीद रेट, गन्ने का बकाया भुगतान आदि प्रमुख मांग शामिल है। किसानों ने बताया कि सरकार ने जो वादा किया था, वह जल्द से जल्द पूरा करे। रैली में किसान नेता राकेश टिकैत, पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह, मुकुट सिंह समेत कई लोग पहुंचे थे। इको गार्डन में भारतीय किसान यूनियन, उ.प्र किसान सभा समेत 50 से ज्यादा छोटे-बड़े संगठन के लोग शामिल हुए। इससे पहले किसानों ने 13 महीने तक दिल्ली में धरना दिया था। इसके बाद लखनऊ में भी बैठक की थी। इसमें तय किया था कि आंदोलन का प्रचार-प्रसार चारों तरफ किया जाए। इससे पहले 19 नवंबर को किसान संगठन विजय दिवस मना चुके हैं। 19 नवंबर को ही सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया था। हालांकि, उसके बाद में सरकार ने जो किसानों से वादा किया था उसको पूरा नहीं किया।

किसानों की प्रमुख मांग..

-किसानों को सिंचाई के लिए फ्री में बिजली। -प्रदेश के गरीबों को 300 यूनिट फ्री बिजली मिले। -इस बार गन्ना का बकाया भुगतान जल्द किया जाए। -राज्य भर में आवारा पशुओं का बंदोबस्त किया जाए। -किसानों के खाद की समुचित व्यवस्था की जाए। -सूखा और अतिवृष्टि का बकाया मुआवजा जैसी तमाम राज्यस्तरीय एवं क्षेत्रीय मांगों को उठाया जाएगा।

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