UP: अस्पतालों के प्रशासनिक पदों पर MBA पास अफसरों की तैनाती का विरोध, PMS ने कहा- निराश करने वाला निर्णय

लखनऊ: प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ (पीएमएस) की बैठक में प्रदेश सरकार के उस निर्णय पर चर्चा की गयी, इसमें कहा गया है कि अस्पतालों के प्रशासनिक पदों पर एमबीए की तैनाती की जाए। संघ से जुड़े चिकित्सकों का कहना है कि यह निर्णय चिकित्सकों को हतोहत्साहित करेगा, उनकी कार्य क्षमता भी प्रभावित होगी। जिलों में लगातार प्रशासनिक पदों पर बैठे हुए अधिकारियों द्वारा चिकित्सकों का शोषण और अपमान किया जा रहा है। संघ के अध्यक्ष डॉ. सचिन वैश्य एवं महामंत्री डॉ. अमित सिंह ने कहा कि यदि प्रशासनिक पदों की परिभाषा इतनी सरल होती तो अन्य विभागों के उच्चाधिकारियों की जगह गैर तकनीकी कार्मिंकों को और बिजनेस मैनेजर्स को तैनात कर दिया जाता। डॉक्टरों का कहना है कि संवर्ग के चिकित्सकों के लिए सेवा शर्तें एवम उनकी नियमावली पहले से ही प्रतिस्थापित है। ऐसे में उनके समक्ष इस क्षेत्र में एक एमबीए एवं अन्य गैर-तकनीकी अधिकारी, जो चिकित्सकीय जिम्मेदारियों के प्रति अनुभवहीन है, को पदभार देना उचित नहीं है। संवर्ग में पूर्व से ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में एनएचएम के अंतर्गत बड़ी संख्या में मैनेजर्स एवं कंसल्टेंट्स तैनात हैं। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय क्षय रोग कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मैनेजर तथा कंसल्टेंट्स प्रत्येक जनपद में तैनात हैं। प्रदेश में विशेषज्ञ सेवाएं देने के लिए लगभग 33 हजार विशेषज्ञ चिकित्सकों की आवश्यकता है और 14 हजार प्लेन एमबीबीएस चिकित्सकों की आवश्यकता है। संवर्ग में सृजित पदों (लगभग 18700) के सापेक्ष लगभग 5000 चिकित्सकों के पद आज भी रिक्त हैं। उन्होंने बताया कि इन सारी बातों से मुख्यमंत्री एवं उच्चाधिकारियों को पत्र तथा ई-मेल के माध्यम से अवगत करा दिया गया है।

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