राष्ट्रपति बाइडन ने की PM मोदी से बात, अमेरिका कोरोना काल में करेगा भारत की मदद

न्यूयार्क अमेरिका कोरोना काल में भारत की मदद करने के लिए तैयार है। राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि कोरोना संकट के खिलाफ भारत की मदद के लिए अमेरिका बहुत कुछ कर रहा है। इसके तहत आक्सीजन और वैक्सीन बनाने के लिए कच्चा माल भेजा गया है। उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की है। भारत को वैक्सीन बनाने के लिए कच्चा माल और अन्य वस्तुओं की जरूरत है। हम उन्हें यह भेज रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका आक्सीजन भी भेज रहा है। इस बीच, विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कोरोना संकट के दौरान अमेरिका की मदद के लिए भारत की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब हम कोरोना महामारी से बुरी तरह जूझ रहे थे तो भारत ने हमारी मदद की थी। उदाहरण के लिए उसने लाखों मास्क मुहैया कराया। हमें यह याद है। अब इस समय हमसे भारत की जो भी मदद बन पड़ेगी, हम करेंगे। भारत में कोरोना के मामलों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी पर चिंता व्यक्त करते हुए अमेरिका की सांसद डेबोरा रास ने राष्ट्रपति जो बाइडन को पत्र लिखकर आक्सीजन सिलेंडर, वेंटिलेटर और अतिरिक्त वैक्सीन की आपूर्ति के जरिये मदद तेज करने का अनुरोध किया है। अपने पत्र में रास ने लिखा, पिछले कुछ हफ्तों से मैंने उन लोगों को सुना है, जो भारत में अपने स्वजनों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति चिंतित हैं। उन्हें डर है कि उनके प्रिय जनों को भी आक्सीजन नहीं मिलने और अस्पताल जाने जैसी स्थिति से गुजरना पड़ सकता है। उन्होंने भारत को तत्काल चिकित्सा सहायता मुहैया कराने के राष्ट्रपति बाइडन के फैसले का स्वागत भी किया। भारत ने अमेरिका की शीर्ष दवा कंपनियों से संपर्क कर देश के औषधि और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में निवेश का अनुरोध किया है। अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू ने इस सिलसिले में फाइजर के सीईओ अलबर्टा बोरला, मार्क कैस्पर के सीईओ थर्मो फिशर, एंटीलिया साइंटिफिक के सीईओ ब‌र्न्ड ब्रस्ट और पैल लाइफ साइंसेज के सीईओ जोसेफ के साथ वर्चुअल बैठकें की हैं। दवा कंपनियों के साथ बातचीत में संधू ने कहा है कि भारत औषधि और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करना चाहता है। भारतीय मूल के अमेरिकी डाक्टरों ने भारत सरकार से प्रतिरक्षा और क्षतिपूर्ति की मांग की है, ताकि वे वर्चुअली या व्यक्तिगत रूप से अपने देश में कोरोना की दूसरी लहर से उत्पन्न संकट के दौरान मरीजों का इलाज कर सकें। कोरोना मरीजों के इलाज के लिए इनमें से कई डाक्टर भारत आना चाहते हैं। द अमेरिकन एसोसिएशन आफ फिजिशियन्स आफ इंडियन ओरिजिन (एएपीआइ) ने इस सिलसिले में उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को पत्र लिखा है।  अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू ने शीर्ष जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डा. एंथनी फासी के साथ वर्चुअल बैठक की है। इस दौरान उन्होंने भारत में मौजूदा कोरोना संकट और नए वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन की प्रभावशीलता पर चर्चा की। पहली बार भारत सरकार के किसी शीर्ष अधिकारी ने फासी ने विचार-विमर्श किया है। डा. फासी महामारी पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के शीर्ष सलाहकार भी हैं। इससे एक दिन पहले ही उन्होंने भारत की स्थिति को गंभीर बताते हुए कोरोना से मुकाबले के लिए सैनिकों को लगाने समेत सारा संसाधन झोंक देने का सुझाव दिया था। संधू ने ट्वीट किया, वायरस के नए वैरिएंट, वैक्सीन और प्रतिक्रिया तंत्र पर बातचीत हुई। उनकी अंतदर्ृष्टि और एकजुटता के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

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