यूपी में लिपिकों के स्थानांतरण निरस्त करने की मांग, CMO कार्यालय व अस्पतालों में काम ठप, दिव्यांग प्रमाण पत्र से लेकर अन्य जरुरी काम बन्द

लखनऊ: स्थानांतरण निरस्त करने की मांग को लेकर सीएमओ कार्यालय एवं सरकारी अस्पतालों में तैनात लिपिकों ने सोमवार को काम ठप कर दिया। इसके खिलाफ लिपिकों ने प्रदेश भर में सीएमओ कार्यालय और अस्पतालों के बाहर प्रदर्शन किया। कर्मचारी नेताओं ने निदेशक प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उन्हें हटाने की मांग की। इससे दिव्यांग प्रमाण पत्र से लेकर अन्य जरुरी काम नहीं हो सका। बहुत से लोग बैंरग वापस लौट गए। वहीं लिपिकों ने स्थानांतरण निरस्त नहीं किए जाने पर आगे आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है।  यूपी मेडिकल एंड पब्लिक हेल्थ मिनिस्टीरियल एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम सिंह, नेता अखिलेश समेत अन्य ने कहा कि प्रदेश में लिपिकों के स्थानांतरण में घोर अनियमिता की गई है। सरकार के ही शासनादेश का खुला उल्लंघन करते हुए नीति विरुद्ध स्थानांतरण किए गए हैं। कहा कि, महिला व दिव्यांग कर्मचारियों को चार सौ किलोमीटर दूर स्थानांतरित कर दिया गया है। कोरोना महामारी के बीच स्वास्थ्य जैसे अहम विभाग में इस तरह की स्थानांतरण नीति बहुत ही गलत है। कर्मचारियों के स्थानांतरण में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने खुलकम मनमानी की है। मुख्यमंत्री के मंशा अनुरुप 20 की जगह पर 70 से 95 फीसदी तक लिपिकों के स्थानांतरण मन माफिक कर दिए गए हैं। नेताओं ने महिला कर्मचारियों को कई सौ किमी दूर, दिव्यांग व दो साल से कम समय में सेवानिवृत्त होने वाले लिपिकों के स्थानांतरण के विरोध में सोमवार को लखनऊ के सीएमओ कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलन के चलते पूरे प्रदेश में सीएमओ व अस्पताल के कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह से प्रभावित रहा। काम कराने आए आमजन को बैरंग लौैटना पड़ा। बताया गया कि निदेशक प्रशासन, चिकित्सा स्वास्थ्य की नजर में दिव्यांग प्रमाण पत्रों का कोई औचित्य नहीं है, इसलिए प्रमाण पत्र नहीं बनाए जाएंगे। एसोसिएशन का कहना है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशक प्रशासन ने विभिन्न माध्यम से बयान दिया कि स्थानांतरण सॉफ्टवेयर से किए गए हैं। जबकि यह भ्रष्टाचार का सॉफ्टवेयर है। संगठन की ओर से कहा गया है कि निदेशक प्रशासन डॉ. राजा ने मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री की महिला सशक्तिकरण एवं दिव्यांग कल्याण नीति की छवि को ठेस पहुंचाई है। इनका निलंबन कर जांच एवं तीनों स्थानांतरण सूची को निरस्त करने की मांग की गई है।

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