NHM कर्मियों को दो साल बाद भी नहीं मिला दुर्घटना बीमा का लाभ, लागू ना होने पर नाराजगी, संघ ने कर्मचारियों हितों की अनदेखी बताया

लखनऊ: राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम कर्मचारी संघ ने पूर्व में एनएचएम में प्रक्रियाधीन रहे दुर्घटना बीमा के दो सालों के बाद भी लागू ना हो पाने पर खेद जताते हुए इसे कर्मचारियों हितों की अनदेखी का मुद्दा बताया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. आनन्द प्रताप सिंह ने मिशन निदेशक व अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को पत्र लिख कर तत्काल इस मुद्दे का संज्ञान लेते हुए दुर्घटना बीमा लागू, अर्जित व चाइल्ड केयर अवकाश प्रदान करने का आग्रह किया है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. आनंद प्रताप सिंह ने बताया कि बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के कर्मचारियों द्वारा पहले आंगनबाडियों व स्कूलों में तो कोविड के दौरान रैपिड रिस्पॉन्स टीम के रूप में गांव गांव भ्रमण करना पड़ता है। वहीं ठेके के माध्यम से उपलब्ध कराये गए ज्यादातर वाहनों की स्थिति भी ज्यादा संतोषजनक नही रहती है। अत: दुर्घटना बीमा की जरूरत एक महत्वपूर्ण जरूरत बन गयी है। उन्होंने कहा कि महिला कर्मचारियों को बाल्य देखभाल अवकाश का लाभ ना दिया जाना मातृत्व व पारिवारिक जिम्मेदारियों के हनन जैसा है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. आनन्द प्रताप सिंह ने मध्यप्रदेश एन एच एम में लागू 15 दिनों के अर्जित अवकाश को उत्तर प्रदेश में भी लागू करने की मांग की है। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए मांग की है कि जब एनएचएम का कर्मचारी अपना पूर्ण योगदान प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में दे रहा है उसके बावजूद भी उनके जीवन व भविष्य से संबंधित मुद्दों की अनदेखी कर्मचारियों में निश्चित रूप से आक्रोश को जन्म दे रही है जो एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है।

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