यूपी में एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल: तीमारदार रिक्शे पर मरीजों को लादकर पहुंचे अस्पताल, 2789 और कर्मी बर्खास्त

लखनऊ: राजधानी समेत पूरे उत्तर प्रदेश में पांचवे दिन शुक्रवार को भी एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल जारी रही। स्वास्थ्य विभाग के एंबुलेंस संचालन सामान्य होने के दावे के बावजूद मरीजों को अस्पतालों की इमरजेंसी तक पहुंचने में जद्दोजहद करनी पड़ी। मरीजों व तीमारदारों को कॉल सेंटर पर फोन करने पर हर बार यही जवाब मिल रहा था कि सेवाएं देना मुश्किल है। ऐसे में मरीजों को एंबुलेंस नहीं मिली। कॉल सेंटर पर फोन करने पर हर बार गाड़ी खाली न होने का हवाला देकर मरीजों को टरकाया गया। दूसरी ओर एम्बुलेंस का चक्का जाम करने वाले कर्मचारियों पर कंपनी ने कड़ा कदम उठाया है। अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 2789 और कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया है। इनमें ड्राइवर और ईएमटी शामिल हैं। खाली पदों के लिए विज्ञापन भी जारी कर दिया गया है। भर्ती प्रक्रिया चालू कर दी गई है। इससे पहले 711 कर्मचारियों की नौकरी से छुट्टी हो चुकी है। वहीं सीएम योगी ओदित्यनाथ ने अफसरों को चेतावनी दी है कि एम्बुलेंस न मिलने की वजह से अगर किसी की असमय मौत की दु:खद घटना की सूचना मिली, तो दोषियों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी। शुक्रवार को पूरे दिन मरीजों को एंबुलेंस आसानी से नहीं मिली। तीमारदार निजी एंबुलेंस या रिक्शे पर मरीजों को लादकर किसी तरह अस्पताल पहुंचे। केजीएमयू, लोहिया संस्थान समेत सरकारी अस्पताल आने वाले करीब 98 प्रतिशत मरीज सरकारी एंबुलेंस की बजाए दूसरे साधनों से अस्पताल पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि एंबुलेंस सेवाएं सामान्य हो चुकी हैं। सरकारी एंबुलेंस चालकों की हड़ताल से पांचवें दिन शुक्रवार को स्थिति विकट बनी रही। स्वास्थ्य महकमा 78 में 5 एंबुलेंस शुरू हो जाने का दावा करता रहा। लेकिन जरूरतमंदों को एंबुलेंस नसीब नहीं हुई। मरीजों की जान बचाने के लिए तीमारदार उन्हें ऑटो और ई.रिक्शा में लादकर अस्पताल पहुंचे। केजीएमयू, लोहिया संस्थान, सिविल समेत अन्य अस्पतालों में 98 प्रतिशत मरीजों को निजी एंबुलेंस, वाहन या ऑटो का सहारा लेना पड़ा।

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